Tuesday, September 20, 2011

Petrol



भाइयो,
कहा तेल कंपनियों द्वारा १५ अगस्त को तेल का दाम घटने की बात कही गयी थे और आज मिडिया तेल का दाम बढ़ने के लिए माहौल खड़ा कर रही है जिससे की तेल का दाम घटने का दबाव न बन पाए, ए तो बहुत बड़ी लूट मची है, पता नहीं इस देश का क्या होगा....
आप खुद हिसाब लगाइए, पेट्रोल की कीमत कितनी  होनी है? तो यह ७४ रुपये में क्यों बेचना चाहते है, यह पैसा कहा ज़ा रहा है?.. पढ़कर जानिए--
पहले ए जानिए---
क्रूड आयल का दाम है ८६ डालर प्रति बैरल,
१ डालर = ४७ रुपये और १ बैरल = १५९ लीटर यानी एक लीटर का दाम=२५.४२ रुपये प्रति लीटर
भारत में रिफाइनिंग खर्च है= प्लांट खर्च-५.४५ रुपये, चालू खर्च-०.५५ रुपये यानि पूरा खर्च=६.०० प्रति लीटर (अमेरिका में यह खर्च १४ सेंट यानी ६.५८ रुपये)
भारत पेट्रोलियम का हर प्रकार का ढुलाई खर्चा अधिकतम ६.०० प्रति लीटर आता है गुजरात में तो यह खर्च ४ रुपये के आसपास है.
पेट्रोल पम्प मालिक का कमीशन -१.५० रुपये  अधिकतम
अब पूरा खर्चा--
क्रूड आयल= २५.४२,
रिफाइनिंग खर्चा=६.००,
ढुलाई खर्चा = ६.००
कमीशन =१.५०
पेट्रोल की कीमत हुई =३८.९२ प्रतिलीटर अधिकतम  
तो इसे ३-०० रुपये और जोड़कर दाम बढ़कर इसे ७४ रुपये तक ले जाने की क्या आवश्यकता है और  ए बाकी का ३५.०८  रुपये कहा ज़ा रहा है.
३८ रुपये की चीज को ७४ रुपये में बेचने का औचित्य क्या है,
जब क्रूड १४७ डालर था तब कंपनिया कह रही थी की उनको ७.०० प्रतिलीटर का घाटा हो रहा है अब क्रूड ८६ रुपये है तो घाटा क्यों हो रहा है, तब पेट्रोल की कीमत ५७ रुपये थी आज ६७ रुपये से  ७१ रुपये है. ए क्या हेरा फेरी है, जनता का खून क्यों चूसकर उद्योग  पतियो को फायदा दिया ज़ा रहा है.
इसक जबाब कौन देगा- सोनिया, राहुल या मन मोहन  सिंह......
लेकिन जनता को तो जबाब चाहिए ही.
(इसे कम से कम ५० लोगो को बताये)
जय भारत,
संजय कुमार मौर्य,
भारत स्वाभिमान,
अयोध्या,
 

Indian Railway reservation

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