Friday, April 8, 2011

Attendees of Blogger Meet


जनाब डॉ० डंडा लखनवी


    एम0 ए0, पी-एच0 डी0 (हिंदी), साहित्यिक लेखन, पठन-पाठन, सामाजिक सेवा,दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान, पर्यटन, काव्य-पाठ भारत के विभिन्न प्रांतों के आकाशवाणी केन्द्रों, दूरदर्शन केन्द्रों तथा साहित्यिक मंचों पर | पुरस्कार/सम्मान:श्रीनारायन दीक्षित हास्य-व्यंग्य पुरस्कार,वर्ष-1976 (मुंबई), एशियालाइट साहित्य सम्मान वर्ष-1988 (लखनऊ), उ0 प्र0 हिंदी संस्थान द्वारा ‘बडे़ वही इंसान’ पुस्तक पर ‘कबीर’ पुरस्कार- वर्ष-1995 उ0प्र0 प्रौढ़ शिक्षा निदेशालय द्वारा नव साक्षरोपयोगी साहित्य-लेखन पर पुरस्कार वर्ष-1997, म0प्र0 साहित्य परिषद, रतलाम द्वारा सम्मानित-वर्ष-1998 झारखंड साहित्य मंडल, पूर्णियाँ द्वारा सम्मानित-वर्ष-1998 (झारखंड़), हिंदी महासभा, बंगलौर द्वारा सम्मानित वर्ष-1999 (कर्नाटक), अमेरिकन बायोग्राफिकल इंस्टीट्यूट द्वारा ‘फाइव थाउजेंड परसानालिटीज आफ दी वर्ड’ के रूप में उल्लेख,वर्ष-1998, शारदा सम्मान:अ.भा.मंचीय कविपीठ, उ0प्र0 -2008 लखनऊ)प्रसारण-कार्य स्वतंत्रता की स्वर्णजयंती पर डी-डी-1 से राष्ट्रीयगीत की संगीतबद्व प्रस्तुति-1997 संपादन कार्य ‘साहित्य सेतु’ त्रैमासिकी, ‘मेरुदंड’ एवं ‘उपलब्धि’ वार्षिकी, संप्रति- लेखन एवं स्वतंत्र पत्रकारिता |


    Recipient of UP State Kabir puraskar 1996 on book ‘swar sarjana ke ‘ by prime minister Atal Bihari Vajpayee (writing hindi poetry, attending kavi sammelans, organising seminars on social issues, free lance journalism,)
    पेशे से वकील, उर्दू, हिन्दी एवं पत्रकारिता में स्नातकोत्तर, विधि स्नातक, ह्यूमन रिलीफ सोसायटी का महासचिव



    मुझको यकीं है सच कहती थी जो भी अम्मी कहती थीं, जब मेरे बचपन के दिन थे चाँद में परियाँ रहती थीं, परियाँ आज भी वहीं हैं, चाँद जाने कहाँ खो गया!

    You've broken up with your old band and are about to release your first solo album. Please write the liner notes:

    Old is sold, new days come...



    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक


    एम.ए.(हिन्दी-संस्कृत)। सदस्य - अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग,उत्तराखंड सरकार, सन् 2005 से 2008 तक। सन् 1996 से 2004 तक लगातार उच्चारण पत्रिका का सम्पादन। मेरे बारे में अधिक जानकारी निम्न लिंक पर भी उपलब्ध है- http://taau.taau.in/2009/06/blog-post_04.html प्रति वर्ष 4 फरवरी को मेरा जन्म-दिन आता है।

    जनाब सलीम ख़ान

    तहज़ीब के शहर लखनऊ की सरज़मीन पर पैदा हुआ, पीलीभीत के तराई इलाके में पला-बढ़ा और अब मुश्तक़िल 1998 से लखनऊ का बाशिंदा हूँ | शिक्षा MBA in Tourism. अंतरजाल पर सन् 2001 से लिख रहा हूँ कई वेबसाइट भी बनाई मगर ब्लॉग जगत से जुडाव 2009 से ही हुआ | शौक़ ग़ज़लों का मगर लेखन विज्ञान व इस्लाम विषयक ही रहे है | भारतीय मुसलमान होने पर गर्व, लेकिन अगर कहीं भेदभाव होता है तो कलम अपने आप उठ जाती है | मुख्य रूप से हमारे समाज में विज्ञान व इस्लाम से जुडी गलतफहमियों को दूर करने वाले लेख ही लिखता हूँ | लोग कहते है कि मैं बहुत बुनियादपरस्त (Fundamentalist) हूँ और वह सही कहते है मैं वाकई बुनियादपरस्त ही हूँ |एक शेर अर्ज़ है ...."मैं अकेला ही चला था जानिबे मंज़िल मगर, लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया!" Cell: 9838659380

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