Wednesday, September 28, 2011

रहस्य

रहस्य
इन राहों में, चलते चलते,
अचानक,
दूर कहीं से कोई आवाज आई,
सुनो! प्रिय सुनो!
फिर एक अट्टहास 
मैं चकित हो, थोड़ा घबराया,
सूनसान सडक, वीरान राहें,
और पूस की ये रात, 
भयावह समां
ये कौन हैं ?, इस वक्त यहां,
किसने हमें पुकारा,
चांद भी आज उगेगा नही,
राह है अभी काफी लंबी,
केवल इन तारों का है साथ,
मगर इस समां में कौन है ?
इस राह का मेरा ये हमराह
हिम्मत करके मैने पूछ ही लिया, 
कौन, कौन हो तुम, कौन, अरे तुम हो कौन, 
कुछ देर के लिए छा गया मौन,
अब है मेरे साथ,
केवल ये समां,
विरान, सूनसान, शीतकाल
और केवल अंधकार,
कुछ देर बाद
सब कुछ
सामान्य,
तभी फिर से
सुनाई दी
वही आवाज,
वही अट्टहास......
फिर उसने दिया मेरे सवालो का 
जवाब....
मै..... मैं हंु तुम्हारा 
जमीर...
तुम्हारी हर राह में,
हर मंजिल में 
तुम्हारा हमसफर, हमराही....
मैंने कहा...
तुम कुछ बताओ
कि इन राहों 
पर चलते रहे
इसी तरह तो 
क्या मुकां होगा
क्या अंजाम होगा 
मेरे मुल्क का 

जबाब आया 
मैं बसा हूं हर एक के सीने में,
इसलिए मैं बताता हूं सबका हाल
आजकल बहुत बदलाव आ गया हैं।
दिलों में फैल गया है अलगाव
विकसित हो रहा है हिंसा का बाजार...

अब सुनो मेरी बात,
ध्यान से सुनो मुझसे ना डरो
मेरी बात समझो,
इस हिंसा के बाजार का नाश
हमें करना होगा,

इससे पहले हमें 
कुछ काम नया करना होगा,
दिलों में बसे अलगाव को मिटाना होगा।
सभी के दिल में प्यार को बसाना होगा।



"नारद"

Sunday, September 25, 2011

ishq


ना जीने की कोई वजह है  ना है कोई साथ
इस अकेलेपन में कौन थामेगा मेरा हाथ
इन अनजानों के समंदर में हर तरफ लगी है घात
हर मोड़ पर है शिकारी शिकार करने को तैनात

नारद इस जहाँ में हर एक शिकारी है
दिल न लगाना तो जिन्दगी से गद्दारी है
ये गद्दारी जो तुम कर लो तो जिन्दगी तुम्हें देती है सजा
जीते रहो इस जहां में तनहा बस यही है सजा

और जो ना की गद्दारी और इश्क कर दिया
अपनी जिंदगी को किसीके नाम कर दिया
तो फिर इसका एक इनाम मिल गया
इनाम में बेवफा का खिताब मिल गया

नारद इस जहाँ के रंग बड़े निराले हैं
जो दीखते  गोरे है बिम्ब में वो ही काले हैं

असमाप्य ...........

"नारद"

Friday, September 23, 2011

दिल की फरियाद के ख़त




















खून से लिखे थे ख़त वो दिल की फरियाद के
तड़पता था दिल वो मेरा तेरी ही याद में

वस्ल में रही तमन्ना तेरे ही दीदार की
जब हुआ दीदार तो वो घडी थी बहार की

वो बहार भी है रुक गई , वो बयार भी है मिट गयी
इन आँधियों से की है नारद उम्मीद क्यूँ तुने प्यार की

कांटो से उलझ कर घाव ही मिल पता है
बेवजह ही शिराओं से लहू छलक जाता है

इश्क करने की "नारद" यही एक कहानी है

लोग कहते है की इश्क जिंदगानी है
पर माना है मैंने बस यही* एक बेगानी है

*बस जिंदगी ही बेगानी है

"नारद"

Thursday, September 22, 2011

मोहब्बत का अंजाम













जो मैंने चाहा नही वो अंजाम हो गया
मेरी तमन्नाओं का ये क्या मुकां हो गया,
मेरी जान रूह सिमटी थी एक आहट में
और वो आहट बसी थी केवल तेरी ही चाहत में,

चाहके भी तुमको हम पा ना सके
दाग लग गया दामन बचा ना सके,
छींटे जो लग उडे रंग--मोहब्बत के
चाह के भी खुद को हम छिपा ना सके,

जब भीग ही गये तो मजा डूब के लिया
वो मजा भी पूरा हम पा ना सके,

डूबते को तिनके ने सहारा दे दिया
इसी के साथ मुझे उसी ने बेसहारा किया,
ले गया मुझको दूर वो किनारे से
ना डूब में सका ना सुखने दिया,

तुम जो सोचो कि नारद तिनके का कद्रदान हैं
ये ना सोचो कि तिनके में मुझे ख्वाबगाह मिला,
सच है कि तिनका मेरा कब्रगाह है बना

ये कहानी बयां कर रहा हुँ आज मैं बेटू
ये समझना ना कि बेवफ़ा था स्वीटू

मैं तुमसे दूर होके अकेला हूं अधूरा हूँ,
तुमसे ही मैं पूरा हूँ
बस जिन्दगी में तेरी ही ख्वाईश रखी
तेरे सिवा अब ना कोई ख्वाईश रही,

तेरी नफरत के आगे मेरी आस टूट गई,
तेरी नफरत के आगे मेरी आस टूट गई,
यादों में जी रहा हूँ , मेरी सांस छूट गई!


"नारद"

Wednesday, September 21, 2011

सौवीं पोस्ट का तड़का


Tuesday, September 20, 2011

Petrol



भाइयो,
कहा तेल कंपनियों द्वारा १५ अगस्त को तेल का दाम घटने की बात कही गयी थे और आज मिडिया तेल का दाम बढ़ने के लिए माहौल खड़ा कर रही है जिससे की तेल का दाम घटने का दबाव न बन पाए, ए तो बहुत बड़ी लूट मची है, पता नहीं इस देश का क्या होगा....
आप खुद हिसाब लगाइए, पेट्रोल की कीमत कितनी  होनी है? तो यह ७४ रुपये में क्यों बेचना चाहते है, यह पैसा कहा ज़ा रहा है?.. पढ़कर जानिए--
पहले ए जानिए---
क्रूड आयल का दाम है ८६ डालर प्रति बैरल,
१ डालर = ४७ रुपये और १ बैरल = १५९ लीटर यानी एक लीटर का दाम=२५.४२ रुपये प्रति लीटर
भारत में रिफाइनिंग खर्च है= प्लांट खर्च-५.४५ रुपये, चालू खर्च-०.५५ रुपये यानि पूरा खर्च=६.०० प्रति लीटर (अमेरिका में यह खर्च १४ सेंट यानी ६.५८ रुपये)
भारत पेट्रोलियम का हर प्रकार का ढुलाई खर्चा अधिकतम ६.०० प्रति लीटर आता है गुजरात में तो यह खर्च ४ रुपये के आसपास है.
पेट्रोल पम्प मालिक का कमीशन -१.५० रुपये  अधिकतम
अब पूरा खर्चा--
क्रूड आयल= २५.४२,
रिफाइनिंग खर्चा=६.००,
ढुलाई खर्चा = ६.००
कमीशन =१.५०
पेट्रोल की कीमत हुई =३८.९२ प्रतिलीटर अधिकतम  
तो इसे ३-०० रुपये और जोड़कर दाम बढ़कर इसे ७४ रुपये तक ले जाने की क्या आवश्यकता है और  ए बाकी का ३५.०८  रुपये कहा ज़ा रहा है.
३८ रुपये की चीज को ७४ रुपये में बेचने का औचित्य क्या है,
जब क्रूड १४७ डालर था तब कंपनिया कह रही थी की उनको ७.०० प्रतिलीटर का घाटा हो रहा है अब क्रूड ८६ रुपये है तो घाटा क्यों हो रहा है, तब पेट्रोल की कीमत ५७ रुपये थी आज ६७ रुपये से  ७१ रुपये है. ए क्या हेरा फेरी है, जनता का खून क्यों चूसकर उद्योग  पतियो को फायदा दिया ज़ा रहा है.
इसक जबाब कौन देगा- सोनिया, राहुल या मन मोहन  सिंह......
लेकिन जनता को तो जबाब चाहिए ही.
(इसे कम से कम ५० लोगो को बताये)
जय भारत,
संजय कुमार मौर्य,
भारत स्वाभिमान,
अयोध्या,
 

Indian Railway reservation

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