Friday, December 30, 2011


आगामी नव वर्ष २०१२ की हार्दिक बधाइयां
तरुण जोशी नारद


इस नव वर्ष के अवसर पर मेरी इच्छा हुई की एक ब्लोगर्स डाइरेक्ट्री का प्रकाशन का प्रयास किया जाए.
जिसमे ब्लॉगर का नाम पता फ़ोन नंबर, ब्लॉग पता जीवन परिचय, फोटो प्रकाशित किया जाये, साथ में कुछ विशेष ब्लोगरों के साक्षात्कार के साथ उनकी विशेष कृतियां

इस हेतु आप सभी से अनुरोध है की मेरा सहयोग करें और उक्त जानकारिय मुझे भेजने का कष्ट करें

नाम
पता
टेलीफोन नम्बर
ई मेल पता
ब्लॉग पता

जीवन परिचय
कृतिया


कृपया ये सूचनाये मुझे मेल से  blogger@naradnetwork.in or 
bloggerdirectory@naradnetwork.in पर या मुझे भेजे मेरे पते पर 
तरुण जोशी नारद
पंचायत समिति के पीछे 
केनपुरा रोड 
रानी (पाली) ३०६११५
mobile  8946890812
 
आपके सुझाव भी आमंत्रित है 
कृपया इस पोस्ट को और सुचना को आगे से आगे प्रेषित करते रहे.



Thursday, December 1, 2011


एक वेबहोस्टिंग और डोमेन रजिस्ट्रार कम्पनी खोलने की तैयारी मैं हूँ.
आप सभी का सहयोग और आशीर्वाद अपेक्षित है
कृपया कोई अच्छा नाम सुझाएँ.
नारद को साथ में लेते हुए...

Sunday, November 20, 2011

Raji



उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधान सभा के चुनावी दंगल में लगभग सभी पार्टियों ने अपनी पूरी ताकत के साथ अपना - अपना बिगुल बजा दिया है ! कोई रथ यात्रा कर रहा है ,  कोई वहां की जनता को " भिखारी " कहकर जगा रहा है तो  कोई मुस्लिम आरक्षण के लिए प्रधानमंत्री को चिठ्ठी लिखने के साथ - साथ विकास के नाम पर पूरे उत्तर प्रदेश को ही चार भागों में पुनर्गठन करने की दांव चल रहा है ! राजनीतिक उठापटक के बीच सब के सब राजनैतिक दिग्गज अपने राजनैतिक समीकरण बैठाने के लिए जी तोड़ कोशिश कर रहे हैं ! होना भी ऐसे चाहिए क्योंकि यही तो एक स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है ! अभी तक के चुनावी दावों में उत्तर प्रदेश की वर्तमान मुख्यमंत्री सुश्री मायावती जी ने उत्तर प्रदेश को चार हिस्से में विभाजित करने का ऐसा तुरुप का इक्का चला है की किसी भी पार्टी को उसका तोड़ नहीं मिल रहा है ! लगता है कि उनके इस तुरुप के इक्के के आगे सभी राजनीतक पार्टियाँ  मात खा गयी ! 

अभी तेलंगाना को अलग राज्य बनाये जाने की मांग ठंडी हुई भी नहीं थी कि मायावती जी ने वर्तमान उत्तर प्रदेश को चार भागों पश्चिमी प्रदेश ( संभावित राजधानी : आगरा ) , बुंदेलखंड ( संभावित राजधानी : झांसी ) , अवध प्रदेश ( संभावित राजधानी : लखनऊ ) और पूर्वांचल प्रदेश ( संभावित राजधानी : वाराणसी ) में बाँटने का खाका पेश कर दिया ! इस पुनर्गठन के पीछे सुश्री मायावती और उनकी पार्टी बसपा का तर्क है कि छोटे राज्यों में कानून - व्यवस्था बनाये रखने के साथ - साथ विकास करना आसान होता है ! चूंकि वर्ष २०११ की जनगणना के अनुसार वहां की जनसँख्या लगभग २० करोड़ के पास है जो कि देश की आबादी का लगभग  १६ प्रतिशत है इसलिए समुचित प्रदेश के विकास के लिए प्रदेश को छोटे राज्यों में पुनर्गठन करना जरूरी है ! 

सैद्धांतिक रूप से लोकतंत्र में छोटे - छोटे राज्यों से जनता की भागीदारी अधिक होती है , इसलिए राहुल सांस्कृत्यायन ने भी एक बार ४९ राज्यों के गठन की बात कही थी ! मेरा व्यक्तिगत मत है कि अलग राज्यों की मांग उठने के पीछे कही न कहीं केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियां जिम्मेदार है क्योंकि मांग उठाने वालों लोगों को लगता है कि उनके साथ भाषा , जाति, क्षेत्र  के आधार पर उनके साथ न्याय नहीं होता है ! ज्ञातव्य है कि भाषा के आधार  राज्य कर पुनर्गठन का श्रीगणेश तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू ने अपनी अदूरदर्शिता का परिचय देते हुए १९५२  में तेलगू भाषी राज्य की मांग मानकर किया था ! क्योंकि मैंने ऐसा पढ़ा है कि समय रहते हस्तक्षेप न करने के कारण एक समाजसेवी श्रीरामुलू के ५८ दिन के आमरण अनशन के बाद १६ दिसम्बर १९५२ में मृत्यु हो जाने के उपरान्त आंध्र प्रदेश में दंगे भड़क गए और आनन-फानन में नेहरू जी ने मात्र तीन दिन के अन्दर अलग राज्य की संसद में घोषणा कर दी ! 

एक लेख के अनुसार , दिसंबर १९५३ न्यायाधीश सैय्यद फजल अली की अध्यक्षता में पहला राज्य पुनर्गठन आयोग बनाया गया ! सितम्बर १९५५ इस आयोग की रिपोर्ट आई और १९५६ में राज्य पुनर्गठन अभिनियम बनाया गया , जिसके द्वारा १४ राज्य और ६ केन्द्रशासित राज्य बनाये गए ! १९६० में राज्य पुनर्गठन का दूसरा दौर चला , परिणामतः बम्बई ( वर्तमान मुंबई ) को विभाजित कर महाराष्ट्र और गुजरात बनाया गया ! १९६६ में पंजाब का बंटवारा कर हरियाणा राज्य बनाया गया !  इसके बाद पूर्वोत्तर क्षेत्र पुनर्गठन अधिनियम १९७१ के अंतर्गत त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर का गठन किया गया ! १९८६ के अधिनियम के अंतर्गत मिजोरम को राज्य के दर्जे के साथ १९८६ के केन्द्रशासित अरुणाचल प्रदेश अधिनियम के अंतर्गत अरुणाचल  प्रदेश को भी पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया ! १९८७ के अधिनियम के तहत गोवा को भी पूर्ण दर्जा दिया गया ! अंतिम पुनर्गठन वर्ष २००० में उत्तराखंड, झारखंड और छतीसगढ़ को बाँट कर किया गया !       

छोटे राज्यों के पुनर्गठन की वकालत करने वालों का मत है है कि भारत में जनसंख्या के आधार पर और क्षेत्रफल के आधार विषमता बहुत है ! एक तरफ जहां लक्षद्वीप का क्षेत्रफल ३२ वर्ग कि.मी. मात्र है तो वही राजस्थान का क्षेत्रफल लगभग ३.५ लाख वर्ग कि.मी. है ! जनसँख्या में जहा उत्तरप्रदेश लगभग २० करोड़ की संख्या को छूने वाला है तो वही सिक्किम की कुल आबादी ६ लाख मात्र है ! परन्तु यहाँ पर यह भी जानना बेहद जरूरी है कि अभी हाल में ही पुनर्गठित हुआ झारखंड राज्य अपने नौ सालों के इतिहासों में लगभग ६ मुख्यमंत्री बदल चुका है ! उसके एक और साथी राज्य छत्तीसगढ़ में किस तरह नक्सलवाद प्रभावी हुआ है यह लगभग हम सबको विदित है ! प्रायः हम समाचारों में देखते व सुनते भी है कि मिजोरम , नागालैंड और मणिपुर आज भी राजनैतिक रूप से किस तरह अस्थिर बने हुए है ! गौरतलब है कि असम से अलग हुए राज्य ( जो कि अपनी जनजातीय पहचान के कारण अलग हुए थे ) नागालैंड , मेघालय, मणिपुर और मिजोरम में कितना समुचित विकास हो पाया यह अपनेआप में ही एक प्रश्नचिंह है ! 

अपनी राजनैतिक रोटियां सेकने के लिए किस तरह से दिल्ली के प्रथम मुख्यमंत्री श्री ब्रहम प्रकाश ने दिल्ली , हरियाणा , राजस्थान के कुछ हिस्से और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को मिलाकर 'बृहत्तर दिल्ली' बनाना चाहा था क्योंकि इससे वो लम्बे समय तक अपने 'जाट वोटों' के जरिये राज कर सकते थे ! समय रहते तत्कालीन नेताओं जैसे गोविन्द बल्लभ पन्त ने उनकी महत्वकांक्षा को पहचान कर उनका जोरदार विरोध कर उन्हें उनके मंतव्य में सफल नहीं होने दिया ! और समय रहते उनकी मांग ढीली पड़ गयी ! वर्तमान समय में फिर एक प्रदेश मुख्यमंत्री ने अपने राज्य के पुनर्गठन की मांग उठाई है ! गौरतलब है कि मात्र छोटे राज्यों के गठन से विकास नहीं होता है ! किसी भी राज्य का विकास वहां  की राजनैतिक इच्छा शक्ति के साथ -साथ सुशासन से होता है !  राज्यों की पंचायत व्यवस्था को दुरुश्त किया जाय , जिसके लिए गांधी जी ने 'पंचायती राज' व्यवस्था की पुरजोर वकालत कर देश के संतुलित विकास की रूपरेखा बनाकर गाँव को समृद्ध बनाने के लिए लघु तथा कुटीर उद्योगों के विकास का सपना देखा था ! एक लेख में मैंने पढ़ा है कि अगर हम उत्तर प्रदेश पर एक नजर दौडाएं तो पाएंगे कि पूर्वी भाग के कई जिलों में  आज भी उद्योगों का सूखा पड़ा है ! चीनी मीलों के साथ - साथ खाद व सीमेंट के कारखाने बंद पड़े है ! सिर्फ पश्चिमी भाग में जो कि दिल्ली से सटा हुआ है , थोडा विकास जरूर हुआ है ( फार्मूला रेस -१ का आयोजन )  ऐसा कहा जा सकता है ! ऐसे में सवाल यह उठता है कि माननीय मुख्यमंत्री जी आखिर आप चाहती क्या है ? प्रदेश का समुचित विकास अथवा खालिश राजनीति !          
     
                                                       - राजीव गुप्ता 

Saturday, October 29, 2011

Life Line


Friday, October 28, 2011

श्रीलालजी शुक्ल हार्दिक श्रद्धांजलि




हार्दिक श्रद्धांजलि

Happy DIwali






दिवाली की हार्दिक शुभकामनायें 

TARUN JOSHI NARAD

Saturday, October 8, 2011

majedar

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Wednesday, October 5, 2011

बहुचर्चित साहित्यिक स्तम्भ ‘तीसरी आँख’ की पुरस्कार/सम्मान-श्रृंखला:



त्रैमा. ‘अभिनव प्रयास’ (अलीगढ़, उप्र) के-
बहुचर्चित साहित्यिक स्तम्भ तीसरी आँख की पुरस्कार/सम्मान-श्रृंखला:


पुरस्कार क्रमांक-1: ‘श्रीमती सरस्वती सिंह स्मृति: श्रेष्ठ सृजन सम्मान’
                                       (1100/-रुपये + प्रमाण-पत्र)
     
वैदिक क्रांति परिषद की संस्थापिका एवं ‘सरस्वती प्रकाशन’ की प्रेरणास्रोत श्रीमती सरस्वती सिंह जी की पावन स्मृति में निर्धारित उक्त सम्मान साहित्य की किसी भी विधा (गद्य-पद्य) के रचनाकार को देय होगा जिसके लिए प्रविष्‍टियाँ निम्नांकित संलग्नकों के साथ 30 जून 2012 तक सादर आमंत्रित हैं:
1. गद्य-पद्य विधा की तीन फुटकर रचनाएँ (प्रकाशित/अप्रकाशित का बंधन नहीं) मौलिकता प्रमाण-पत्र के साथ।
2. सचित्र परिचय + डाक टिकटयुक्त एक लिफ़ाफ़ा व पता लिखे दो पोस्टकार्ड।

विशेष: इस सम्मान हेतु श्रेष्‍ठ/स्तरीय प्रविष्‍टियों के अभाव की स्थिति में रचनाओं का चयन देशव्यापी पत्र-पत्रिकाओं, इंटरनेट, गद्य/पद्य संग्रहों, आदि में से किया जा सकता है।
        प्रायोजक:                                    परामर्शदाता:                        चयनकर्ता:                                                                             
  डॉ. आनन्दसुमन सिंह                       श्री अशोक ‘अंजुम’              जितेन्द्र ‘जौहर’                                       
(प्र. संपादक ‘सरस्वती सुमन)         (संपादक ‘अभिनव प्रयास’)         (स्तम्भकार: ‘तीसरी आँख’) 
  देहरादून, उत्तराखण्ड.                            अलीगढ़, उ.प्र.                         सोनभद्र, उप्र

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पुरस्कार क्रमांक-2: ‘श्री केशरीलाल आर्य स्मृति गीत/दोहा सम्मान’
                              (5100/-रुपये  + प्रमाण-पत्र)

आर्य समाज-सेवक, स्वाभिमानी राष्‍ट्रभक्त एवं पूर्व स्वतंत्रता सेनानी श्री केशरीलाल आर्य जी की शैक्षिक जागरूकता का सहज अनुमान इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि उन्होंने सन्‌ 1930 में स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी। उनकी पावन स्मृति में स्थापित उपर्युक्त वार्षिक सम्मान वरिष्‍ठ गीतकार/दोहाकार डॉ. देवेन्द्र आर्य की पितृ-भक्ति का प्रतीक है। यह सम्मान राष्‍ट्रीय स्तर पर चुने गये किसी श्रेष्‍ठ कवि/कवयित्री (कोई आयु-बंधन नहीं) को गीत अथवा दोहा-सृजन के लिए देय होगा। इस सम्मान हेतु प्रविष्‍टियाँ निम्नांकित संलग्नकों के साथ 31 मार्च 2012 तक सादर आमंत्रित हैं:

1. मौलिक गीत-संग्रह अथवा दोहा-संग्रह (प्रकाशन-वर्ष का कोई बंधन नहीं) की दो प्रतियाँ।
2. सचित्र परिचय, प्रविष्‍टि-शुल्क रु. 200/- (मनीऑर्डर द्वारा; चेक अस्वीकार्य) + डाक टिकटयुक्त एक लिफ़ाफ़ा व पता लिखे दो पोस्टकार्ड।


     प्रायोजक:                     परामर्शदाता:                                      चयनकर्ता:                                                                             
   डॉ. देवेन्द्र आर्य                डॉ. शिवओम अम्बर                               जितेन्द्र ‘जौहर’                                      
(वरिष्‍ठ साहित्यकार)         (वरिष्‍ठ साहित्यकार)                      (स्तम्भकार: ‘तीसरी आँख’) 
  ग़ाज़ियाबाद, उप्र.                 फ़र्रुख़ाबाद, उ.प्र.                                 सोनभद्र, उ.प्र.
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पुरस्कार क्रमांक-3: ‘श्रीमती रत्‍नादेवी स्मृति काव्य-सृजन सम्मान’ 
                                            (5001/- रुपये + प्रमाण-पत्र)
डिप्टी कलेक्टर के रूप में तीन दशक का बेदाग़ सेवाकाल बिताने वाले 74 वर्षीय श्री आमोद तिवारीजी शांत स्वभाव एवं वैदुष्य के धनी हैं। उनकी गहन साहित्य-निष्‍ठा का प्रतीक उपर्युक्त वार्षिक सम्मान उनकी स्वर्गीया धर्मपत्‍नी श्रीमती रत्‍नादेवी जी की पावन स्मृति में स्थापित किया गया है जो कि राष्‍ट्रीय स्तर पर चयनित किसी श्रेष्‍ठ कवि/कवयित्री (युवाओं को विशेष वरीयता, तथापि आयु-बंधन नहीं) को देय होगा। इस सम्मान हेतु प्रविष्‍टियाँ निम्नांकित संलग्नकों के साथ 31 मार्च 2012 तक सादर आमंत्रित हैं: 

1. काव्य की किसी भी विधा (छांदस/अछांदस) के मौलिक प्रकाशित संग्रह (प्रकाशन-वर्ष का कोई बंधन नहीं) की दो प्रतियाँ अथवा मौलिकता प्रमाण-पत्र के साथ अप्रकाशित कृति (पाण्डुलिपि) अथवा न्यूनतम 15 फुटकर कविताएँ।
2. सचित्र परिचय, प्रविष्‍टि-शुल्क रु. 200/- (मनीऑर्डर द्वारा; चेक अस्वीकार्य) + डाक टिकटयुक्त एक लिफ़ाफ़ा व पता लिखे दो पोस्टकार्ड।
 
    प्रायोजक:                              परामर्शदाता:                                चयनकर्ता:                                                                             
श्री आमोद तिवारी          डॉ. रामसनेहीलाल शर्मा ‘यायावर’                  जितेन्द्र ‘जौहर’                                       
(पूर्व डिप्‍टी कलेक्टर)               (वरिष्‍ठ साहित्यकार)                        (स्तम्भकार: ‘तीसरी आँख’) 
   कटनी, म.प्र.                             फ़िरोज़ाबाद, उ.प्र.                               सोनभद्र, उ.प्र.
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विशेष ध्यानार्थ:
1.उपर्युक्त सभी सम्मान/पुरस्कार ‘तीसरी आँख’ द्वारा आयोजित एक भव्य ‘सम्मान-समारोह’ एवं गरिमापूर्ण ‘अखिल भारतीय कवि-सम्मेलन’ में प्रदान किये जायेंगे जिनका विस्तृत समाचार विविध पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशनार्थ प्रेषित किया जायेगा। साथ ही, चयनित कवि/कवयित्री की चुनिन्दा रचनाओं को विभिन्न प्रतिष्‍ठित वेबसाइट्‍स/इंटरनेट पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित करने का प्रयास रहेगा। 

2.चयन-प्रक्रिया अत्यन्त पारदर्शी एवं त्रिस्तरीय होगी जिसे परिणामों के साथ घोषित किया जायेगा। कृतियों के निष्पक्ष चयन का आधार-कथन (संक्षिप्‍त समीक्षा के साथ) ‘तीसरी आँख’ में प्रकाशित करने का प्रयास रहेगा। 

3.प्रविष्‍टि-शुल्क का उद्‍देश्य व्यावसायिक नहीं है। इन सम्मानों/पुरस्कारों का मूल उद्‍देश्य श्रेष्‍ठ साहित्य-सृजन को प्रेरित करना है। 

4.प्रशंसकों/शुभचिंतकों द्वारा भेजी गयी अपने प्रिय कवि/कवयित्री की प्रविष्‍टियाँ (वांछित संलग्नकों के साथ) स्वीकार्य हैं।  

5.किसी पाण्डुलिपि के चुने जाने की स्थिति में निर्धारित सम्मान/पुरस्कार उसके प्रकाशनोपरान्त ही प्रदान किया जायेगा।
 
6.सभी सम्मानों के लिए अलग-अलग प्रविष्‍टियों की छूट उपलब्ध है; लिफ़ाफ़े पर सम्मान/पुरस्कार का नाम एवं क्रमांक स्पष्‍ट रूप से लिखें। संलग्नकों के अभाव में प्रविष्‍टि अमान्य होगी।  

7.प्रायोजकों अथवा परामर्शदाताओं से चयन-प्रक्रिया अथवा निर्णायक-मण्डल आदि से संबंधित अनपेक्षित जानकारी माँगना अयोग्यता माना जायेगा। किसी भी समय नियम-परिवर्तन एवं अंतिम निर्णय-संबधी सर्वाधिकार उपर्युक्त नामांकित मण्डल के पास सुरक्षित हैं। निर्णय-संबधी कोई भी विवाद कदापि स्वीकार्य नहीं होगा। 

8.वांछित संलग्नकों के साथ समस्त प्रविष्‍टियाँ ‘तीसरी आँख’ के निम्नांकित पते पर निर्धारित तिथि से पूर्व भेजें: 

जितेन्द्र ‘जौहर’
(स्तम्भकार ‘तीसरी आँख’) 
आई आर-13/6, रेणुसागर-231218, 
सोनभद्र (उप्र). मोबा. 09450320472
ईमेल: jjauharpoet@gmail.com
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Sunday, October 2, 2011

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तरुण जोशी "नारद"

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कविता श्रेणी प्रेम 

कविता श्रेणी भ्रष्टाचार 

Wednesday, September 28, 2011

रहस्य

रहस्य
इन राहों में, चलते चलते,
अचानक,
दूर कहीं से कोई आवाज आई,
सुनो! प्रिय सुनो!
फिर एक अट्टहास 
मैं चकित हो, थोड़ा घबराया,
सूनसान सडक, वीरान राहें,
और पूस की ये रात, 
भयावह समां
ये कौन हैं ?, इस वक्त यहां,
किसने हमें पुकारा,
चांद भी आज उगेगा नही,
राह है अभी काफी लंबी,
केवल इन तारों का है साथ,
मगर इस समां में कौन है ?
इस राह का मेरा ये हमराह
हिम्मत करके मैने पूछ ही लिया, 
कौन, कौन हो तुम, कौन, अरे तुम हो कौन, 
कुछ देर के लिए छा गया मौन,
अब है मेरे साथ,
केवल ये समां,
विरान, सूनसान, शीतकाल
और केवल अंधकार,
कुछ देर बाद
सब कुछ
सामान्य,
तभी फिर से
सुनाई दी
वही आवाज,
वही अट्टहास......
फिर उसने दिया मेरे सवालो का 
जवाब....
मै..... मैं हंु तुम्हारा 
जमीर...
तुम्हारी हर राह में,
हर मंजिल में 
तुम्हारा हमसफर, हमराही....
मैंने कहा...
तुम कुछ बताओ
कि इन राहों 
पर चलते रहे
इसी तरह तो 
क्या मुकां होगा
क्या अंजाम होगा 
मेरे मुल्क का 

जबाब आया 
मैं बसा हूं हर एक के सीने में,
इसलिए मैं बताता हूं सबका हाल
आजकल बहुत बदलाव आ गया हैं।
दिलों में फैल गया है अलगाव
विकसित हो रहा है हिंसा का बाजार...

अब सुनो मेरी बात,
ध्यान से सुनो मुझसे ना डरो
मेरी बात समझो,
इस हिंसा के बाजार का नाश
हमें करना होगा,

इससे पहले हमें 
कुछ काम नया करना होगा,
दिलों में बसे अलगाव को मिटाना होगा।
सभी के दिल में प्यार को बसाना होगा।



"नारद"

Sunday, September 25, 2011

ishq


ना जीने की कोई वजह है  ना है कोई साथ
इस अकेलेपन में कौन थामेगा मेरा हाथ
इन अनजानों के समंदर में हर तरफ लगी है घात
हर मोड़ पर है शिकारी शिकार करने को तैनात

नारद इस जहाँ में हर एक शिकारी है
दिल न लगाना तो जिन्दगी से गद्दारी है
ये गद्दारी जो तुम कर लो तो जिन्दगी तुम्हें देती है सजा
जीते रहो इस जहां में तनहा बस यही है सजा

और जो ना की गद्दारी और इश्क कर दिया
अपनी जिंदगी को किसीके नाम कर दिया
तो फिर इसका एक इनाम मिल गया
इनाम में बेवफा का खिताब मिल गया

नारद इस जहाँ के रंग बड़े निराले हैं
जो दीखते  गोरे है बिम्ब में वो ही काले हैं

असमाप्य ...........

"नारद"

Friday, September 23, 2011

दिल की फरियाद के ख़त




















खून से लिखे थे ख़त वो दिल की फरियाद के
तड़पता था दिल वो मेरा तेरी ही याद में

वस्ल में रही तमन्ना तेरे ही दीदार की
जब हुआ दीदार तो वो घडी थी बहार की

वो बहार भी है रुक गई , वो बयार भी है मिट गयी
इन आँधियों से की है नारद उम्मीद क्यूँ तुने प्यार की

कांटो से उलझ कर घाव ही मिल पता है
बेवजह ही शिराओं से लहू छलक जाता है

इश्क करने की "नारद" यही एक कहानी है

लोग कहते है की इश्क जिंदगानी है
पर माना है मैंने बस यही* एक बेगानी है

*बस जिंदगी ही बेगानी है

"नारद"

Thursday, September 22, 2011

मोहब्बत का अंजाम













जो मैंने चाहा नही वो अंजाम हो गया
मेरी तमन्नाओं का ये क्या मुकां हो गया,
मेरी जान रूह सिमटी थी एक आहट में
और वो आहट बसी थी केवल तेरी ही चाहत में,

चाहके भी तुमको हम पा ना सके
दाग लग गया दामन बचा ना सके,
छींटे जो लग उडे रंग--मोहब्बत के
चाह के भी खुद को हम छिपा ना सके,

जब भीग ही गये तो मजा डूब के लिया
वो मजा भी पूरा हम पा ना सके,

डूबते को तिनके ने सहारा दे दिया
इसी के साथ मुझे उसी ने बेसहारा किया,
ले गया मुझको दूर वो किनारे से
ना डूब में सका ना सुखने दिया,

तुम जो सोचो कि नारद तिनके का कद्रदान हैं
ये ना सोचो कि तिनके में मुझे ख्वाबगाह मिला,
सच है कि तिनका मेरा कब्रगाह है बना

ये कहानी बयां कर रहा हुँ आज मैं बेटू
ये समझना ना कि बेवफ़ा था स्वीटू

मैं तुमसे दूर होके अकेला हूं अधूरा हूँ,
तुमसे ही मैं पूरा हूँ
बस जिन्दगी में तेरी ही ख्वाईश रखी
तेरे सिवा अब ना कोई ख्वाईश रही,

तेरी नफरत के आगे मेरी आस टूट गई,
तेरी नफरत के आगे मेरी आस टूट गई,
यादों में जी रहा हूँ , मेरी सांस छूट गई!


"नारद"

Indian Railway reservation

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